धमधा। किसानों की कर्ज संबंधी समस्याओं और कर्ज माफी की मांग को लेकर धमधा में पिछले 48 दिनों से जारी भूख हड़ताल अब राजनीतिक और बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े सवालों को लेकर चर्चा में है। एक ओर किसान IDBI बैंक से जुड़े कर्ज विवाद में राहत की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर आंदोलन को लेकर राजनीतिक समर्थन और शासन-प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच आंदोलन से जुड़े 38 किसानों द्वारा कांग्रेस से इस्तीफा देने की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस के किसी भी जनप्रतिनिधि के आंदोलन स्थल पर नहीं पहुंचने से नाराज होकर इन किसानों ने पार्टी छोड़ने का फैसला लिया।
कर्ज माफी के भरोसे में नहीं चुकाया कर्ज, अब तीन गुना तक बढ़ी राशि!
आंदोलनरत किसानों का आरोप है कि वे अपना कर्ज चुकाना चाहते थे, लेकिन IDBI बैंक से जुड़े कर्ज माफी के कथित आश्वासन के चलते उन्होंने समय पर भुगतान नहीं किया। अब ब्याज जुड़ने के कारण कर्ज की राशि मूल रकम की तुलना में करीब तीन गुना तक पहुंच गई है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते स्थिति स्पष्ट हो जाती, तो वे कर्ज चुकाने या समझौते के माध्यम से मामले का समाधान निकालने का प्रयास कर सकते थे।
कुछ किसानों का कर्ज माफ, बाकी को कुर्की के नोटिस देने का आरोप
किसानों के मुताबिक, चुनिंदा 18 से 20 किसानों का 100 प्रतिशत कर्ज माफ किया गया है, जबकि अन्य किसानों को राहत देने के बजाय कुर्की के नोटिस भेजे जा रहे हैं। किसानों का आरोप है कि बैंक प्रबंधन न तो उनके साथ वन टाइम सेटलमेंट (OTS) के माध्यम से समाधान निकाल रहा है और न ही उनकी समस्याओं पर सार्थक बातचीत कर रहा है। किसान चाहते हैं कि बैंक उनके मामलों की समीक्षा करे और कर्ज चुकाने के लिए व्यावहारिक समाधान निकाले। हालांकि, इन आरोपों पर बैंक का पक्ष सामने आना बाकी है।
मुख्यमंत्री निवास पहुंचे किसान, निजी सचिव ने नहीं लिया ज्ञापन
अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री निवास पहुंचे किसानों ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के निजी सचिव ने उनका ज्ञापन स्वीकार नहीं किया। इसके बाद किसानों ने अपना ज्ञापन मुख्यमंत्री निवास के पास की दीवार पर चिपका दिया और वापस लौट आए। किसानों ने 14 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि निर्धारित अवधि में उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे दोबारा मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचेंगे।
अब किसानों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि 14 दिनों के भीतर उनकी मांगों पर क्या कार्रवाई होती है और शासन स्तर पर कर्ज की समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
सांसद विजय बघेल ने भी दिया मदद का आश्वासन
इसी बीच दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के सांसद विजय बघेल ने भी किसानों की समस्या के समाधान में मदद का आश्वासन दिया है। किसानों को राहत दिलाने के लिए वन टाइम सेटलमेंट (OTS) के माध्यम से कर्ज का समाधान निकालने की बात भी सामने आई है। किसानों को उम्मीद है कि इस दिशा में ठोस पहल होने से उन्हें बढ़ते कर्ज और ब्याज के बोझ से राहत मिल सकती है। अब देखना होगा कि सांसद के आश्वासन के बाद बैंक प्रबंधन से बातचीत कब होती है और OTS के माध्यम से राहत दिलाने के प्रयास किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।
48 दिन की भूख हड़ताल, इस्तीफे और 14 दिन का अल्टीमेटम
एक तरफ किसान कर्ज, बढ़ते ब्याज और कुर्की के नोटिसों से परेशान हैं, तो दूसरी ओर आंदोलन के दौरान राजनीतिक जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति को लेकर नाराजगी भी सामने आई है। इसी नाराजगी के बीच 38 किसानों के कांग्रेस से इस्तीफा देने की खबर ने स्थानीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है।
अब पूरे मामले में तीन अहम सवाल हैं— क्या मुख्यमंत्री निवास के पास से लौटे किसानों की मांगों पर 14 दिनों के भीतर कार्रवाई होगी? क्या सांसद विजय बघेल के आश्वासन के बाद IDBI बैंक वन टाइम सेटलमेंट के जरिए किसानों को राहत देगा? और क्या बैंक प्रबंधन किसानों के साथ बातचीत कर कर्ज विवाद का व्यावहारिक समाधान निकालेगा?
48 दिनों से जारी किसान आंदोलन के बीच अब सरकार, सांसद और बैंक प्रबंधन की अगली पहल पर सबकी नजरें टिकी हैं। किसानों को आश्वासनों के बजाय ठोस समाधान का इंतजार है,या फिर जाएंगे किसान मुख्यमंत्री निवास?
वही कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफादेन वाले में राजकुमार साहू कार्यकारणी सदस्य ब्लॉक कांग्रेस कमेटी धमधा,ओमप्रकाश पटेल पूर्व बूथ अध्यक्ष कांग्रेस दनिया,पंचराम साहू,देव चरण साहू ,राधेश्याम,मनीराम ,रामसिंह, बिसंभर साहू,अरुण साहू,सुभाष साहू,नरेश साहू,हेमराज,चैनलाल इत्यादि 38 किसानों ने ब्लॉक कांग्रेस कमेटी धमधा अध्यक्ष शिवकुमार वर्मा को इस्तीफा सौंप दिया।

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