सरकारी रिकॉर्ड में सेंध ? गजानन-रीना मेश्राम के नाम पर करोड़ों का खेल, विशाल शर्मा की भूमिका पर उठे बड़े सवाल !
रायपुर। राजधानी रायपुर में जमीनों की खरीद-बिक्री और राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेरफेर से जुड़ी शिकायत ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ताओं ने शर्मा बिल्डर्स के विशाल शर्मा पर कथित तौर पर जमीनों के सौदों और दस्तावेजी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका होने के आरोप लगाए हैं। शिकायत में गजानन मेश्राम और उनकी पत्नी रीना मेश्राम के नाम से हुई रजिस्ट्रियों, बाद में किए गए कथित दानपत्र तथा अलग-अलग खरीदारों को जमीनों की बिक्री का उल्लेख किया गया है। शिकायत के मुताबिक मामला लगभग 4 एकड़ 47 डिसमिल जमीन से संबंधित है और इसमें कुल नौ रजिस्ट्रियों का हवाला दिया गया है। आरोप है कि जमीनों की खरीद के बाद उनके अलग-अलग हिस्से आगे बेच दिए गए। वहीं, आसपास स्थित कुछ अन्य खसरों के राजस्व रिकॉर्ड में कथित बदलाव तथा उन जमीनों की बिक्री के प्रयास को लेकर भी शिकायत में गंभीर आपत्तियां उठाई गई हैं। नौ रजिस्ट्रियों के बाद सात दानपत्र का दावा शिकायत में कहा गया है कि महेश गोयल और उनकी माताजी की ओर से गजानन मेश्राम के नाम नौ रजिस्ट्रियां कराई गई थीं। इनमें से दो रजिस्ट्रियां अभी भी गजानन मेश्राम के नाम होने का दावा किया गया है, जबकि शेष सात जमीनों को बाद में दानपत्र (Gift Deed) के माध्यम से उनकी पत्नी रीना मेश्राम के नाम हस्तांतरित किए जाने की बात कही गई है। इसके बाद इन्हीं जमीनों के अलग-अलग हिस्सों की बिक्री किए जाने का आरोप है। ऐसे में दानपत्रों की वैधता, उनके निष्पादन का आधार, नामांतरण की प्रक्रिया और बाद में किए गए बिक्री विलेखों की वैधानिक स्थिति जांच का महत्वपूर्ण विषय बन गई है। खसरा नंबरों और जमीन के क्षेत्रफल को लेकर सवाल शिकायत में खसरा नंबर 336/2, 313, 318, 320/2, 275, 273/1, 273/2 और 273/3 का उल्लेख किया गया है। इनमें अलग-अलग हिस्सों में 5639 वर्गफीट, 776 वर्गफीट, 1500 वर्गफीट, 2059 वर्गफीट, 3000 वर्गफीट और 1837 वर्गफीट सहित हेक्टेयर में दर्ज भूमि का विवरण होने की बात कही गई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इन खसरों की जमीन के विभिन्न हिस्से अलग-अलग लोगों को बेचे जाने के बाद भी रिकॉर्ड की स्थिति और आसपास की भूमि के स्वामित्व को लेकर कई सवाल बने हुए हैं। उनका आरोप है कि यदि बिक्री के बाद रिकॉर्ड में कोई बदलाव हुआ है तो उसकी प्रक्रिया और जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। अन्य खसरों पर भी कथित छेड़छाड़ का आरोप शिकायत में खसरा नंबर 302/2, 301, 316, 382/1, 302/5, 303/3, 302/3, 302/4, 302/6, 303/4 और 401/3 का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इन जमीनों पर दूसरे लोगों का स्वामित्व होने के बावजूद कथित रूप से इनसे संबंधित बिक्री के प्रयास किए गए। यदि दस्तावेजी जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला महज निजी भूमि विवाद नहीं रह जाएगा, बल्कि राजस्व रिकॉर्ड, नामांतरण, पंजीयन प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। विशाल शर्मा की कथित भूमिका जांच के केंद्र में पूरे मामले में शर्मा बिल्डर्स के विशाल शर्मा की कथित भूमिका को लेकर भी शिकायत में सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जमीनों की खरीद-बिक्री और दस्तावेजी प्रक्रिया में उनका प्रभाव था तथा गजानन मेश्राम एवं रीना मेश्राम के नामों का इस्तेमाल जमीनों की रजिस्ट्री और हस्तांतरण के लिए किया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। यह जांच का विषय है कि संबंधित जमीनों के सौदों में विशाल शर्मा की प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष भूमिका क्या थी, गजानन मेश्राम से उनका वास्तविक कारोबारी संबंध क्या था और जमीनों के हस्तांतरण एवं बिक्री के लिए प्रस्तुत दस्तावेज राजस्व रिकॉर्ड से पूरी तरह मेल खाते हैं या नहीं। प्रशासन और पंजीयन विभाग के सामने कई सवाल यदि शिकायत में बताए गए दस्तावेज उपलब्ध हैं, तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए प्रशासन और पंजीयन विभाग द्वारा मूल दस्तावेजों का मिलान महत्वपूर्ण होगा। इनमें—
* मूल खसरा पंचशाला और बी-1 * राजस्व नक्शा एवं भूमि अभिलेख * नामांतरण आदेश और रिकार्ड * नौ रजिस्ट्रियों के मूल दस्तावेज * कथित सात दानपत्र * संबंधित बिक्री विलेख * जमीन की पूर्व एवं वर्तमान स्वामित्व स्थिति * संबंधित पक्षों के बीच लेन-देन और अधिकारों के दस्तावेज का परीक्षण किया जाना जरूरी है। रिकॉर्ड की जांच से सामने आ सकती है पूरी तस्वीर फिलहाल पूरा मामला शिकायत में लगाए गए आरोपों और उसमें बताए गए दस्तावेजों की सत्यता पर निर्भर है। यदि प्रशासन मूल राजस्व रिकॉर्ड और पंजीयन दस्तावेजों का खसरा-वार मिलान कराता है, तो यह स्पष्ट हो सकता है कि जमीनों का वास्तविक स्वामित्व किसके पास था, किन लोगों के नाम पर कब रजिस्ट्रियां हुईं, दानपत्र किस आधार पर बनाए गए और बाद में जमीनें किन लोगों को बेची गईं। सबसे अहम सवाल यही है कि यदि राजस्व रिकॉर्ड में किसी प्रकार की अनियमितता या छेड़छाड़ हुई है, तो वह कब, किस स्तर पर और किस प्रक्रिया के तहत हुई ? अब पूरे मामले में प्रशासन और पंजीयन विभाग की जांच पर नजर है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और इस पूरे जमीन लेन-देन में किन-किन लोगों की वास्तविक भूमिका रही है।

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