अपडेट: Oct 01, 2026 05:45 PM
हाईकोर्ट में राज्य सरकार की जानकारी प्राथमिक जांच में आरोप प्रमाणित बताए गए, आगे की जांच के लिए दीपांशु काबरा और प्रशांत कुमार अग्रवाल के नाम प्रस्तावित

बिलासपुर। निलंबित वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रतनलाल डांगी से जुड़े महिला उत्पीड़न के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। राज्य सरकार की ओर से न्यायालय को बताया गया कि मामले में की गई प्राथमिक जांच के दौरान लगाए गए आरोप प्रमाणित पाए गए हैं। इसके बाद अब मामले की आगे की विभागीय जांच को लेकर पुलिस मुख्यालय स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को दी गई जानकारी के अनुसार, मामले की आगे की जांच के लिए आईपीएस अधिकारी दीपांशु काबरा को जांचकर्ता अधिकारी तथा आईपीएस प्रशांत कुमार अग्रवाल को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बनाए जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। बताया गया कि पुलिस महानिदेशक (DGP) की ओर से इस संबंध में प्रस्ताव गृह सचिव को भेजा गया है। अब गृह विभाग की स्वीकृति और आगामी कार्रवाई पर निगाह बनी हुई है। हाईकोर्ट की कार्यवाही के बाद जांच प्रक्रिया में बदलाव यह मामला पहले से ही न्यायिक निगरानी के दायरे में है। अगस्त 2026 में हाईकोर्ट ने मामले की जांच को लेकर राज्य के गृह सचिव और पुलिस मुख्यालय से जवाब मांगा था। उस समय शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से जांच की निष्पक्षता को लेकर आपत्ति उठाई गई थी और समान रैंक के अधिकारियों द्वारा जांच किए जाने पर सवाल किए गए थे। अब राज्य सरकार द्वारा आगे की जांच के लिए नए अधिकारियों के नाम प्रस्तावित किए जाने से मामले में जांच की दिशा में नया चरण शुरू होने की संभावना है। हालांकि प्रस्तावित अधिकारियों की नियुक्ति और उनके अधिकार क्षेत्र को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित सरकारी आदेश जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। पूरा मामला - रतनलाल डांगी के खिलाफ छत्तीसगढ़ पुलिस में पदस्थ एक सब-इंस्पेक्टर की पत्नी ने शारीरिक, मानसिक और अन्य प्रकार के उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। शिकायत के बाद पुलिस मुख्यालय स्तर पर जांच प्रक्रिया शुरू हुई थी। अक्टूबर 2025 में मामले की जांच की जिम्मेदारी तत्कालीन स्तर पर आईपीएस अधिकारी आनंद छाबड़ा को दिए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद मार्च 2026 में राज्य सरकार ने रतनलाल डांगी को निलंबित कर दिया। निलंबन आदेश में अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियमों के उल्लंघन और पद के अनुरूप आचरण नहीं करने से संबंधित आरोपों का उल्लेख किया गया था। डांगी ने आरोपों से किया था इनकार मामले में रतनलाल डांगी की ओर से भी आरोपों का खंडन किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने शिकायतकर्ता महिला और उसके पति पर ब्लैकमेल करने तथा उन्हें दबाव में लेने जैसे आरोप लगाए थे। इसलिए मामले में दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं और इन दावों की वास्तविकता का निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से होना है। अब आगे क्या होगा यह सवाल है ? हाईकोर्ट में राज्य सरकार द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, दीपांशु काबरा को जांचकर्ता अधिकारी और प्रशांत कुमार अग्रवाल को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बनाए जाने का प्रस्ताव गृह सचिव को भेजा गया है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो विभागीय जांच की आगामी प्रक्रिया इन अधिकारियों की भूमिका में आगे बढ़ सकती है। मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह प्रस्तावित है। ऐसे में अगली सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष सरकार द्वारा जांच की वर्तमान स्थिति, प्रस्तावित अधिकारियों की नियुक्ति और आगे की कार्रवाई से संबंधित जानकारी रखे जाने की संभावना है।

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