अपडेट: Oct 10, 2026 06:04 PM
13 कंपनियों के पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द रिपोर्टों के अनुसार, जिन 13 NBFC कंपनियों के पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द किए गए हैं, उनमें 11 कंपनियां पश्चिम बंगाल में और दो कंपनियां तमिलनाडु में पंजीकृत हैं

11 कंपनियां पश्चिम बंगाल और 2 तमिलनाडु में पंजीकृत; RBI ने सितंबर में जारी किए रजिस्ट्रेशन रद्द करने के आदेश, 10 अन्य कंपनियों ने भी सरेंडर किए प्रमाणपत्र मुंबई, 10 अक्टूबर 2026। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) के खिलाफ नियामकीय कार्रवाई करते हुए 13 कंपनियों के पंजीकरण प्रमाणपत्र (Certificate of Registration—CoR) रद्द कर दिए हैं। इस कार्रवाई के बाद संबंधित कंपनियां रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान का कारोबार नहीं कर सकेंगी। RBI की यह कार्रवाई 9 अक्टूबर 2026 को जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार की गई है। 13 कंपनियों के पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द रिपोर्टों के अनुसार, जिन 13 NBFC कंपनियों के पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द किए गए हैं, उनमें 11 कंपनियां पश्चिम बंगाल में और दो कंपनियां तमिलनाडु में पंजीकृत हैं।

इन कंपनियों के नाम इस प्रकार हैं: 1. Nakodar Finance Private Limited 2. Ajitnath Steels Private Limited 3. Astrol Dealcom Private Limited 4. Bhagyashri Trading Private Limited 5. Booh Finance Company Private Limited 6. Britex Financial Services Private Limited 7. Sajili Vinimay Private Limited 8. Bhumika Fiscal Services Private Limited 9. Blue Mount Exports Private Limited 10. Delta Capital Market Limited 11. Rajesh Fiscal Services Private Limited 12. Sarla Finance Private Limited 13. Shreyans Vyapaar Private Limited

इन कंपनियों के पंजीकरण रद्द करने के आदेश सितंबर 2026 में अलग-अलग तारीखों पर जारी किए गए थे। किस कानून के तहत हुई कार्रवाई? रिजर्व बैंक ने यह कार्रवाई भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45-IA(6) के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए की है। इस कार्रवाई का सीधा अर्थ यह है कि संबंधित कंपनियां अब गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान के रूप में ऐसा कारोबार नहीं कर सकतीं, जिसके लिए RBI का वैध पंजीकरण आवश्यक है। हालांकि, केवल पंजीकरण रद्द होने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि संबंधित प्रत्येक कंपनी धोखाधड़ी में शामिल थी। कंपनियों के पंजीकरण रद्द करने के विशिष्ट कारणों के बारे में उपलब्ध रिपोर्टों में अलग-अलग विवरण नहीं दिया गया है। 10 अन्य कंपनियों ने भी सरेंडर किए पंजीकरण प्रमाणपत्र 13 कंपनियों के पंजीकरण रद्द करने के अलावा, रिजर्व बैंक ने 10 अन्य NBFC कंपनियों के पंजीकरण प्रमाणपत्र सरेंडर करने की प्रक्रिया भी पूरी की। इन कंपनियों के प्रमाणपत्र वापस किए जाने के पीछे अलग-अलग कारण बताए गए हैं। इनमें गैर-बैंकिंग वित्तीय कारोबार बंद करना, नियामकीय मानदंडों के तहत पंजीकरण से छूट की श्रेणी में आना तथा विलय, विघटन या अन्य कारणों से कानूनी इकाई का अस्तित्व समाप्त होना शामिल है।

ग्राहकों और निवेशकों को क्या ध्यान रखना चाहिए? इस कार्रवाई के बाद NBFC कंपनियों से जुड़े ग्राहकों और निवेशकों को कुछ महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान देना चाहिए: कंपनी का पंजीकरण जांचें: किसी NBFC से नया वित्तीय लेनदेन करने से पहले RBI के रिकॉर्ड में उसकी पंजीकरण स्थिति की पुष्टि करें। पुराने ऋण के दस्तावेज सुरक्षित रखें: यदि आपने संबंधित कंपनी से ऋण लिया है, तो ऋण समझौता, भुगतान रसीदें, बैंक स्टेटमेंट और अन्य दस्तावेज संभालकर रखें। भुगतान संबंधी जानकारी सत्यापित करें: यदि कंपनी के पंजीकरण रद्द होने के बाद ऋण भुगतान के लिए कोई नया खाता या भुगतान माध्यम बताया जाता है, तो उसकी पुष्टि संबंधित अधिकृत पक्ष से करें। शिकायत की स्थिति में उचित मंच पर संपर्क करें: भुगतान, वसूली या ऋण खाते को लेकर विवाद होने पर संबंधित कंपनी और लागू शिकायत निवारण व्यवस्था से संपर्क करें। ध्यान रहे कि पंजीकरण रद्द होने का अर्थ अपने आप यह नहीं है कि कंपनी के सभी पुराने ऋण समाप्त हो गए हैं या ग्राहकों की सभी देनदारियां खत्म हो गई हैं। पुराने अनुबंधों और देनदारियों की स्थिति संबंधित कानूनी प्रावधानों एवं तथ्यों पर निर्भर करेगी।

RBI की कार्रवाई से वित्तीय क्षेत्र में बढ़ी निगरानी पर चर्चा, रिजर्व बैंक की इस कार्रवाई से NBFC क्षेत्र में नियामकीय अनुपालन और पंजीकरण की वैधता का महत्व एक बार फिर सामने आया है। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए लागू नियमों का पालन करना आवश्यक है और वैध पंजीकरण के बिना संबंधित वित्तीय कारोबार जारी नहीं रखा जा सकता।

← पिछला समाचार अगला समाचार →